हमारे दैनिक जीवन में हर क्षण कुछ न कुछ परिवर्तन होते रहते हैं। जैसे—लोहे में जंग लगना, दूध से दही बनना, भोजन का पचना, या सांस लेना। ये सभी परिवर्तन रासायनिक अभिक्रियाओं के कारण होते हैं।

1. मूल अवधारणाएँ (Basic Concepts)
रासायनिक अभिक्रिया (Chemical Reaction): – जब कोई पदार्थ अकेले ही या किसी अन्य पदार्थ से क्रिया करके भिन्न गुण वाले एक या अधिक नए पदार्थों का निर्माण करता है, तो उस पूरी प्रक्रिया को रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं।
- उदाहरण: जब मैग्नीशियम रिबन को वायु (ऑक्सीजन) में जलाया जाता है, तो मैग्नीशियम ऑक्साइड का सफेद चूर्ण बनता है।
अभिकारक (Reactants) – वे पदार्थ जो किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं (अर्थात जो आपस में क्रिया करते हैं), उन्हें अभिकारक कहते हैं। इन्हें समीकरण में हमेशा बाईं ओर (Left Hand Side – LHS) लिखा जाता है।
प्रतिफल या उत्पाद (Products) – रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरूप बनने वाले नए पदार्थों को प्रतिफल या उत्पाद कहते हैं। इन्हें समीकरण में हमेशा दाईं ओर (Right Hand Side – RHS) लिखा जाता है।
रासायनिक अभिक्रिया की पहचान: किसी भी क्रिया के रासायनिक होने का पता इन परिवर्तनों से चलता है:
- अवस्था में परिवर्तन (Change in State)
- रंग में परिवर्तन (Change in Color)
- गैस का निकास/उत्सर्जन (Evolution of Gas)
- तापमान में परिवर्तन (Change in Temperature)
- अवक्षेप का बनना (Formation of a Precipitate)
2. रासायनिक समीकरण (Chemical Equation)
किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों (अभिकारकों और उत्पादों) को उनके संकेतों और सूत्रों (Symbols & formulas) की सहायता से संक्षिप्त रूप में प्रदर्शित करना रासायनिक समीकरण कहलाता है
- शब्द समीकरण: हाइड्रोजन + ऑक्सीजन → जल
- रासायनिक समीकरण: 2H2 + O2 → 2H_2O
संतुलित रासायनिक समीकरण (Balanced Chemical Equation) – वैसा रासायनिक समीकरण जिसके दोनों ओर (LHS और RHS) प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होती है, उसे संतुलित रासायनिक समीकरण कहते हैं।
2H_2 + O_2 → 2H_2O (यहाँ दोनों तरफ H = 4 और O = 2 हैं, इसलिए यह संतुलित है।)
संतुलित करना क्यों आवश्यक है? द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान का निर्माण होता है और न ही विनाश। इसलिए अभिकारकों का कुल द्रव्यमान = उत्पादों का कुल द्रव्यमान होना अनिवार्य है। इसे संतुलित करने के लिए ‘हिट एंड ट्रायल’ (Hit and Trial Method) का उपयोग किया जाता है।
असंतुलित या कंकाली रासायनिक समीकरण (Unbalanced/Skeletal Chemical Equation) – वैसा समीकरण जिसमें दोनों ओर के तत्वों के परमाणुओं की संख्या समान नहीं होती है।
H_2 + O_2 → H_2O (यहाँ बाईं ओर O = 2 है जबकि दाईं ओर O = 1 है, अतः यह असंतुलित है।)
रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार (Types of Chemical Reactions) – बिहार बोर्ड की परीक्षा की दृष्टि से अभिक्रियाओं के ये प्रकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
- संयोजन या संश्लेषण अभिक्रिया (Combination Reaction) – वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक (तत्व या यौगिक) आपस में जुड़कर केवल एक एकल उत्पाद (Single Product) का निर्माण करते हैं। अभिकारक (A) + अभिकारक (B) → उत्पाद (AB)
- उदाहरण 1 (कोयले का दहन): C_(s) + O_2(g) → CO_2(g)
- उदाहरण 2 (मैग्नीशियम का दहन): 2Mg_(s) + O_2(g) → 2MgO_(s)
- उदाहरण 3 (बिना बुझा चूना और जल): CaO_(s) + H_2O_(l) → Ca(OH)_2(aq) + ऊष्मा
(नोट: इस प्रक्रिया में अत्यधिक ऊष्मा निकलती है, जिसका उपयोग दीवारों की सफेदी करने में होता है।)
- वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction) – यह संयोजन अभिक्रिया के ठीक विपरीत होती है। वह अभिक्रिया जिसमें एक बड़ा यौगिक टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों या यौगिकों में बदल जाता है। यौगिक (AB) → उत्पाद (A) + उत्पाद (B)
यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की ऊर्जा द्वारा होती है:
- A. ऊष्मीय अपघटन (Thermal Decomposition – ऊष्मा द्वारा): जब कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) को गर्म किया जाता है, तो वह कैल्शियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूट जाता है। CaCO_3(s) →ऊष्मा CaO_(s) + CO_2(g)
- B. वैद्युत अपघटन (Electrolytic Decomposition – विद्युत द्वारा): जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर वह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस में टूट जाता है। 2H_2O_(l) →विद्युत धारा 2H_2(g) + O_2(g)
- C. प्रकाशीय अपघटन (Photolytic Decomposition – सूर्य के प्रकाश द्वारा): सिल्वर क्लोराइड को सूर्य के प्रकाश में रखने पर वह धूसर (Grey) रंग के सिल्वर धातु में बदल जाता है। 2AgCl_(s) →सूर्य का प्रकाश 2Ag_(s) + Cl_2(g)
(उपयोग: इस अभिक्रिया का उपयोग श्याम-श्वेत फोटोग्राफी (Black and White Photography) में किया जाता है।)
विस्थापन अभिक्रिया (Single Displacement Reaction) – वह अभिक्रिया जिसमें एक अधिक अभिक्रियाशील तत्व, कम अभिक्रियाशील तत्व को उसके जलीय विलयन (यौगिक) से अलग (विस्थापित) कर देता है। A + BC → AC + B
- उदाहरण: जब लोहे की कील (Fe) को कॉपर सल्फेट (CuSO_4) के नीले विलयन में डुबाया जाता है, तो विलयन का रंग हरा (FeSO_4) हो जाता है और कॉपर अलग हो जाता है।
Fe_(s) + CuSO_4(aq) → FeSO_4(aq) + Cu_(s) (चूंकि आयरन, कॉपर से अधिक क्रियाशील है, इसलिए उसने कॉपर को हटा दिया।)
द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)- वे अभिक्रियाएँ जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान (Exchange of Ions) होता है और नए यौगिक बनते हैं। AB + CD → AD + CB
- उदाहरण: सोडियम सल्फेट और बेरियम क्लोराइड की अभिक्रिया कराने पर बेरियम सल्फेट का सफेद अवक्षेप बनता है। Na_2SO_4(aq) + BaCl_2(aq) → BaSO_4(s)↓ + 2NaCl_(aq)
अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) – ऐसी कोई भी अभिक्रिया जिसमें किसी अघुलनशील ठोस (अवक्षेप – Precipitate) का निर्माण होता है जो जल में नीचे बैठ जाता है, उसे अवक्षेपण अभिक्रिया कहते हैं। (ऊपर दी गई द्विविस्थापन अभिक्रिया इसका सटीक उदाहरण है)।
उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction) – जब कोई अम्ल किसी क्षारक के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाता है, तो उसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। (इसका विस्तृत अध्ययन अध्याय 2 में है)। HCl + NaOH → NaCl + H2O
ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): जिन अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा (Energy) बाहर निकलती है।
- उदाहरण: प्राकृतिक गैस का दहन: CH_4(g) + 2O_2(g) → CO_2(g) + 2H_2O_(g) + ऊष्मा
- विशेष प्रश्न: श्वसन (Respiration) को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों कहते हैं? क्योंकि हमारे शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज ऑक्सीजन के साथ मिलकर टूटता है और हमें ऊर्जा (ATP के रूप में) प्रदान करता है।
- ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction): जिन अभिक्रियाओं में अभिकारकों को तोड़ने के लिए बाहर से ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा की आवश्यकता होती है (अवशोषण होता है)।
- उदाहरण: सभी वियोजन (Decomposition) अभिक्रियाएं ऊष्माशोषी होती हैं।
उपचयन (ऑक्सीकरण) एवं अपचयन (अवकरण) – [Redox Reaction]
- उपचयन (Oxidation): किसी अभिक्रिया में पदार्थ में ऑक्सीजन (O_2) की वृद्धि होना या हाइड्रोजन (H_2) का ह्रास (कमी) होना उपचयन कहलाता है।
- अपचयन (Reduction): किसी अभिक्रिया में पदार्थ में ऑक्सीजन (O_2) का ह्रास (कमी) होना या हाइड्रोजन (H_2) की वृद्धि होना अपचयन कहलाता है।
- रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction): वैसी अभिक्रिया जिसमें उपचयन और अपचयन दोनों प्रक्रियाएं एक साथ होती हैं।
CuO + H_2 →ऊष्मा Cu + H_2O
- यहाँ CuO → Cu बन रहा है (ऑक्सीजन की कमी = अपचयन)
- यहाँ H_2 → H_2O बन रहा है (ऑक्सीजन की वृद्धि = उपचयन)
दैनिक जीवन में उपचयन (ऑक्सीकरण) के प्रभाव – दैनिक जीवन में उपचयन के दो सबसे घातक प्रभाव देखने को मिलते हैं:
संक्षारण (Corrosion) – जब कोई धातु अपने आसपास की वायु, नमी (आर्द्रता), या अम्ल के संपर्क में आती है, तो वह धीरे-धीरे कमजोर या नष्ट होने लगती है। इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं। उदाहरण: लोहे पर लाल-भूरे रंग की परत चढ़ना (लोहे में जंग लगना)।, चांदी के ऊपर काली परत का जमना।, तांबे के ऊपर हरी परत का चढ़ना।
- बचाव के उपाय: पेंट करके, तेल या ग्रीस लगाकर, या यशदलेपन (Galvanization – जस्ते की परत चढ़ाकर)।
विकृतगंधिता (Rancidity) – वसा (Fat) और तेल से बने हुए खाद्य पदार्थ जब लंबे समय तक हवा के संपर्क में रहते हैं, तो वे ऑक्सीजन द्वारा उपचयित (Oxidize) हो जाते हैं। इससे उनका स्वाद और गंध बदल जाते हैं और वे खराब हो जाते हैं। इसी को विकृतगंधिता कहते हैं।
बचाव के उपाय:
-
- खाद्य पदार्थों को वायुरोधी बर्तनों (Air-tight containers) में रखना।
- चिप्स के पैकेटों में से ऑक्सीजन निकालकर नाइट्रोजन (एक अक्रिय गैस) भरना ताकि उपचयन न हो सके।
- रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) में भोजन रखना।
अध्याय 1 के सबसे महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षा प्रश्न (VVI Questions)
प्रश्न 1. वायु में जलाने से पहले मैग्नीशियम रिबन को साफ क्यों किया जाता है?
उत्तर: मैग्नीशियम एक बहुत ही क्रियाशील धातु है। जब यह खुली हवा में रहती है, तो इसके ऊपर मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) की एक सुरक्षात्मक परत जम जाती है। यह परत मैग्नीशियम को जलने में बाधा उत्पन्न करती है। इसलिए इसे जलाने से पहले रेगमाल (Sandpaper) से रगड़कर साफ किया जाता है।
प्रश्न 2. जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है, तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है?
उत्तर: लोहा (Fe), कॉपर (Cu) की तुलना में अधिक क्रियाशील तत्व है। इसलिए यह कॉपर सल्फेट के नीले विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है और हल्के हरे रंग के आयरन सल्फेट (FeSO_4) का निर्माण करता है, जिससे विलयन का रंग बदल जाता है।
प्रश्न 3. संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: (ऊपर अनुभाग 2A में दिया गया विवरण पूरा लिखें—द्रव्यमान संरक्षण का नियम)।